Astrology

क्या बार बार अपना कुंडली दिखवाने से भाग्य कमजोर होता है ?

किसी ने जिज्ञासा प्रकट करी , जिसका उत्तर उन्होंने सर्वहित में सार्वभौमिक रूप से माँगा गया है :-

प्रश्न ;-क्या बार बार किसी को अपना भाग्य पूछने से या कुंडली /राशि दिखवाने से भाग्य कमजोर होता है ?

Astrologer शाश्वत शर्मा

उत्तर :-बार बार कुंडली दिखवाने से भाग्य कमज़ोर नहीं होता। परंतु, ज्योतीष विद्या को परखने के लिए कुंडली
दिखने से अष्टम भाव कमज़ोर पड़ता है, इस भाव से जातक के जीवन में आने वाले कष्ट या विपरीत समय
को देखा जाता है ।

कुछ भी मूल्य चुकाए बिना लेने से, चाहे वह फ्री ज्योतिष सलाह हो या कुछ और, उससे
शनि ग्रह और पंचम भाव कमज़ोर पड़ता है, ये भाव बुद्धिमता , आत्मन ,प्रसिद्धि और संचित कार्य का प्रतीक
है ।

धर्म की निंदा , पूर्वजों की निंदा से नवम भाव कमज़ोर पड़ता है, ये भाव आपके भाग्य और पिता से
सम्बंधित भी है । अपने दुःखों का कारण दूसरों को बताने से तीसरा भाव कमज़ोर पड़ता है, ये भाव पराक्रम
भाव कहा जाता है , आपका परिश्रम , बल और आपके उत्साह का प्रतीक है , यहाँ तक की आपके साथ होने
वाली चोरी की घटनाये और आपके स्वास्थ्य सम्बन्धी बीमारियों क अभी सूचक है ।

इन भावों के कमज़ोर पड़ने से आपकी सोच, पुरुषार्थ करने की शक्ति, मान-सम्मान, भाग्य में कमी आती है।
मित्रो आपकी जन्मकुंडली ही आपके सम्पूर्ण जीवन का आधार वयक्त करती है, इसकी शुभता आपके जन्म से सम्बंधित है , जितना
महत्त्व आप अपने जीवन में होने वाली अप्रिय घटनाओ को देते हैं और जिसके समाधान हेतु आप अपनी कुंडली बार बार हर किसी को दिखते हैं उससे आपके जीवन के दुःख और परेशानिया भले ही काम न हो परन्तु आपकी कुंडली की शुभता काम होती रहती है ! जोकहीं न कहीं आपके भाग्य की शक्ति को क्षीण करती हैं !

पुरातन काल में भी जब कोई विपदा आती थी जिसका समाधान अधिक से अधिक पुरुषार्थ करने पर भी न निकला जा सके तब उस
अवस्था में राज ज्योतिषी को या किसी योग्य पंडित को कुंडली दिखाया जाता था तथा समाधान या उपाय ग्रहन किये जाते थे !

धीरे धीरे ये रिवाज काम हो गए और आज के परिपेक्षः में ये लुप्प्त ही हो गए हैं ! पहले प्रत्येक परिवार या कुल का एक पंडित हुआ करताथा जिसके परामर्श और आदेश अनुसार ही कुल और घर परिवार में व्रत, पूजा , अनुष्ठान या कोई भी बड़ा और महत्वपूर्ण कार्य हुआ करता था , उस समाज में ब्राह्मणो और पंडितो की एक अलग शक्तिशाली भूंमिका होती थी और उनका बहुत मान सम्मान किया जाता था , ब्राह्मण या पंडित ज्ञान और विद्या का प्रतीक हैं , जो की गुरु बृहस्पति के समकक्ष हैं , गुरु को प्रसन्न रखना अर्थात अपने बृहस्पति देव को सशक्त करना, गुरु कृपा और आशीर्वाद से मार्ग में आये हुए कई संकट ताल जाते थे , गुरु सदैव सरल और लाभदायक रास्ता दिखते थे !

ये कुल ब्राह्मण ही घर में जन्मे प्रत्येक नवजात की कुंडली का निर्माण करता था और समय समय पर जबआवश्यकता होती थी तभी उस कुंडली को खोलकर उसको अपने अध्धयन पटल पर रखकर माँ सरस्वती , और गणेश जी का ध्यानकरते हुए उस कुंडली की शुभता को नमन कर, जातक के उज्ज्वल भविष्य और वर्तमान की कामना करते हुए उसका अध्ध्यन आरम्भकिया जाता था , गृह चल और उसके भाव को समझते हुए उसकी गढ़ना करी जाती थी की किस प्रकार गृह की विपरीतकारक अवस्था जातक के लिए परेशानी उत्पन्न कर सकती है और उसके दुष्प्रभावों को कम करने के लिए उपयुर्क्त उपाय क्या हो सकते हैं !

ये उपाय गुरु मुख से दिए जाते थे और उसमे गुरु का आशीर्वाद सहृदय होता था ! जो जातक के मृत्युतुल्य कष्टों को भी टालने में समर्थ था !

वर्तमान काल में , ये प्रथा किसी जाति- प्रजाति के सम्मान ही लुप्त हो गयी हैं ! क्यूंकि उस तरह के सम्पूर्ण जानकारी और विद्या रखने वाले विद्वान् ब्राह्मण अब कुछ शेष ही हैं और जो हैं जो कुछ अच्छा करना चाहते हैं उनको उचित मान सम्मान नहीं मिल पाता !

अतः आपसे अनुरोध है की सबसे पहले आप अपनी जन्मकुंडली का उचित सम्मान करें क्यूंकि वही आपके भाग्य से जुडी हुई है और
कर्मो का आधार है !

उसके पश्चात उस ब्राह्मण या पंडित का सम्मान रखे जिसके द्वारा आपकी कुंडली का विश्लेषण हो रहा है या वो
अपना समय आपके कुंडली अध्धयन के लिए निकल कर आपके लिए उपाय बताता है !

जो लोग सक्षम होते हुए भी दक्षिणा के पैसे बचने में विश्वास रखते हैं उनको ये भी विश्वास होना चेहये की वो अपने कुंडली भाग्य से जुड़े हुए कितने ही भाव और उनसे
सम्बंधित प्राप्त होने वाले फलो की को काम करते जा रहे है ! ये एक विचारणीय त्थय है !

ऐसा नहीं की उसका सम्मान केवल पैसो से या किसी अन्य प्रलोभन से हो लेकिन किसी ब्राह्मण के प्रति अपना आभार और धन्यवाद करना भी अपने आप में बहुत बड़ा सत्कार और सम्मान है ! आप ब्राह्मण के आशीष से अपना बृहस्पति शक्त कर सकते हैं और उन बताये गए उपाय को प्रभावशाली बना सकते हैं !

हर किसी को आप पानी कुंडली ऐसे ही न दिखाए वो एक कागज का टुकड़ा नहीं है परन्तु आपके भाग्य और कर्मो का लेख है जो हर
किसी के बस की बात नहीं की समझ कर आपको समझा सके , इसलिए इसको पढ़ने के लिए ज्योतिष विद्या का निर्माण हुआ है और उसके लिए जग में ज्योतिष या पंडित हैं

** नोट :- ये लेख किसी व्यक्ति विशेष के ऊपर करी गयी कोई टिपण्णी नहीं है अपितु विचारणीय जो इस माध्यम से प्रस्तुत किये गए हैं !

लेखक:-

Astrologer शाश्वत शर्मा

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